Sunday, May 24, 2020

Namaz


Namaz 

 नमाज़ हर मुसलमान का पहला फर्ज़ है ।  हमारे प्यारे 
नबी  हुजूर  पाक मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेह वसल्ल्म ने फरमाया 
नमाज़ को  जान बूझ  कर छोड़ देना अपने आपको इस्लाम से बाहर कर लेना है । नमाज़ हमे तमाम गुनाहो से बचाती है । बेहयाई  से  रोकती है, अल्लाह के रास्ते पे चलाती है। इसलिए हर मुसलमान को  चाहिये कि    वो नमाज़ किसी भी हाल मे ना भूले ।


  नमाज़ पढ़ने का एक सही तरीका होता है उसी तरीके से हमे नमाज़ अता करनी चाहिये ।कई बार लोग जल्दी  जल्दी मे नमाज़ पढ़ते है  जो बहुत गलत है । नमाज़ हमेशा धीरे-धीरे और सुन्ननत  तरीके से  पढ़ना चाहिये । ताकि हमारी नमाज़ क़ुबूल हो और हम पूरा सवाब कमा सके ।
  नमाज़ का सुन्नत तरीका कुछ इस तरह है-

नमाज़ के लिये वुज़ू होना जरूरी है। वुज़ू करने  के लिये सबसे पहले नियत करे कि- बिस्मिल्ला हिर रहमान निर रहीम, नियत करता हूँ  मै वुज़ू कि  वास्ते नमाज़ पढ़ने के ।  फिर अपने हाथो की हथेलियो को आगे से पीछे की तरफ 3 बार अछे से धोएं,  फिर 3 बार कुल्ला करे, 3 बार नाक  मे पानी डाले  अच्छे से साफ़ करे, 3 बार मुह पे पानी डालकर धोए, फिर 3 बार हथेली मे पानी लेकर हाथ कोहनी तक धोएं फिर दोबारा हाथ कोहनी तक अच्छे से धोए । फिर हथेली मे पानी लेकर कान और गले मे अछे से मसा कर ले फिर 3 बार पैर के ऐड़ि  तक अच्छे से पानी  डालकर धो ले।  वुज़ू साफ़ जगह पर बैठकर करना चाहिये  वुज़ू का मेन मकसद है  कि आप पाक  साफ़  हो ।
  किसी पाक जगह पर जानमाज़  बिछाकर काबा शरीफ की तरफ़ रुख कर  के उस पर खड़े हो जाईए । और  नियत करिये जो  नमाज़ आप पढ़ रहे हैं और जितनी रकात पढ़ रहे  है ।  अगर आप फ़र्ज़ नमाज़  की दो रकात पढ़ने जा  रहे है, तो नियत करे- नियत करता हूँ मै दो रकात नमाज़ फ़र्ज़ की वास्ते अल्लाह ताला के, रुख मेरा काबा शरीफ की तरफ।
 फिर अल्लाह हू अकबर कहते  हुए नियत बांधते हुए अपने दोनो हाथो को कान की लौ तक ले जाकर सीने पे बान्ध लेंगे ( औरतें सीने पे बांधे और मर्द सीने  से नीचे) । दाया हाथ बाए हाथ के ऊपर होना चाहिये । 
पैर सीधे होने चाहिये और निगाहे जा नमाज़ पर। 
  1. फिर  हाथ बाँधने के बाद सना पढ़िए  “सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबारका इस्मुका व त’आला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका” (अर्थात: ए अल्लाह मैं तेरी पाकि बयां करता हु और तेरी तारीफ करता हूँ और तेरा नाम बरकतवाला है, बुलंद है तेरी शान और नहीं है माबूद तेरे सिवा कोई।)
  2. इसके बाद त’अव्वुज पढ़े। त’अव्वुज के अल्फाज़ यह है “अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम. बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम।” 
  3. इसके बाद  अलहमदोशरीफ  ( सूरह फातिहा )पढे  । फिर सुरे फ़ातिहा के बाद कोई एक सूरा और पढ़े।
  4. इसके बाद अल्लाहु अकबर (तकबीर) कह कर रुकू में जायें।
  5. रुकू में जाने के बाद अल्लाह की तस्बीह बयान करे “सुबहान रब्बी अल अज़ीम (अर्थात: पाक है मेरा रब अज़मत वाला)
  6. इसके बाद ‘समीअल्लाहु लिमन हमीदा’ कहते हुवे रुकू से खड़े हो जाये। (अर्थात: अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी तारीफ की, ऐ हमारे रब तेरे ही लिए तमाम तारीफे है।)
  7. खड़े होने के बाद ‘रब्बना व लकल हम्द , हम्दन कसीरन मुबारकन फिही’ जरुर कहें।
  8. इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें।
  9. सज्दे में फिर से अल्लाह की तस्बीह बयान करे। ‘सुबहान रब्बी अल आला (अर्थात: पाक है मेरा रब बड़ी शान वाला है)
  10. इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे से उठकर बैठे।
  11. फिर दोबारा अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें।
  12. सज्दे में फिर से अल्लाह की तस्बीह करे ‘सुबहान रब्बी अल आला’  ह हो गई नमाज़ की एक रक’आत। इसी तरह उठ कर आप दूसरी रक’अत पढ़ सकते हैं। दो रक’आत वाली नमाज़ में सज्दे के बाद तशहुद में बैठिये.
. तशहुद में बैठ कर सबसे पहले अत्तहिय्यात पढ़िए। अत्तहिय्यात के अल्लाह के रसूल ने सिखाये हुवे अल्फाज़ यह है,
‘अत्ताहियातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तैयिबातू अस्सलामु अलैका अय्युहन नाबिय्यु रहमतुल्लाही व बरकताहू अस्सलामु अलैना व आला इबादिल्लाहिस सालिहीन अशहदु अल्ला इलाहा इल्ललाहू व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसुलहू’

. इसके बाद दरूद पढ़े। दरूद के अल्फाज़ यह है,
‘अल्लाहुम्मा सल्ली अला मुहम्मद व आला आली मुहम्मद कमा सल्लैता आला इब्राहिम वा आला आली इब्राहिमा इन्नका हमिदुम माजिद. अल्लाहुम्मा बारीक़ अला मुहम्मद व आला आली मुहम्मद कमा बारकता आला इब्राहिम वा आला आली इब्राहिमा इन्नका हमिदुम माजिद’
इसके बाद ये दुआ पढ़े- 
रब्बना आतिना फिद दुनिया हसनतव वाफिल आखिरति हसनतव व किना अज़ाबन नार।
(ए हमारे रब ! हमें दुनिया में भी भलाई अता फरमा और आखिरत में भी भलाई अता फरमा और हमें दोज़ख़ के अज़ाब से बचा ले)।
इस तरह से दो रक’अत नमाज़ पढ़ कर आप सलाम फेर सकते हैं। ‘अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह’ कहकर आप पहले   सीधे और        फिर  उलटे जानिब सलाम फेरें।
 ये 2 रकात नमाज का तरीका है इसी तरह आप 3 या 4 रकात नमाज़ भी पढ सकते हैं । बस उसमे आप दूसरी रकात मे आत्तहिय्यात पढनें  के बाद फिर से अल्लाह  हु अकबर कहते हुए खड़े हो जाएँगे औए इसी तरह  दोहराएंगे ।  
             
                   

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